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हम अंजान लोगो पर भरोसा करते है लेकिन अपनों पर नहीं क्यूँ

लोग बुहूत है ! इस दुनिया मेँ लेकिन फिर भी लोगो का टाइम अकेले बित्ता है क्यूँ !

क्या अपने कभी सोचा है इस बारे मेँ !!!!!!!!!!!!!

लोग बुहूत है इस दुनिया मेँ लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ता ! अगर फर्क पड़ता है तो सिर्फ इस बात से कि आप कितने लोगो को जानते है ! देखा जाए तो इस पूरी दुनिया मेँ कितने लोग है ! चलो पूरी दुनिया कि बात छोरों सिर्फ अपने भारत देश की बात करते है ! पूरे भारत देश मेँ कितने लोग है ! चलो छोरों पूरे ‘’भारत देश को छोरों सिर्फ अपने स्टेट की बात करते है ! जिस किटी में आप रहते है या यू कहे के जिस गली मुहल्ले में आप रहते है खैर जहा भी आप रहते है तो वाहा आप कितने लोगो को जानते है या फिर यू कहे के आप अपने यार दोस्तो और रिश्तेदार में कितने लोगो को जानते है

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क्या आपको पता है कि सिर्फ जानने से फर्क नहीं पड़ता फर्क अगर पड़ता है तो इस बात से कि आप अपने जनपहचान वालों पर भरोसा करते है या नहीं और करते है तो कितना ????

क्या आपको पता है कि हम लोग अपने जानने वाले लोगो पर भरोसा नहीं करते है और यह बात सच है और यह बात आप भी जानते है ???

अपने कभी सोचा है कि हम जिन लोगो को नहीं जानते है और जिनसे हम कभी मिले भी नहीं होते है लेकिन फिर भी लोग उन अंजान लोगो पर जल्दी भरोसा कर लेते है क्यू ??? कैसे ???

खैर जोह भी हो इसका एक एक्जाम्पल देता हो में आपको बाकी आप खुद सोचना

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जैसे कि कोई अपने शहर से दूसरे शहर जा रहा है और वो बंदा सस्ता भूल गया हो और उसके साथ कोई नहीं है वो अकेला है लेकिन अब उससे दूसरे शहर भी जाना है तो अब वह क्या करेगा अब उसे जोह कोई भी रास्ते में मिलेगा उस से रास्ता पूछेगा और उस आदमी को शुक्रिया कहे कर उसके बताइए हुए रास्ते पर चल देगा जिस आदमी से उसने रास्ता पूछा है यह ना तो उसे जनता है और ना ही कभी मिला है और शायद दुबारा कभी मिलेगा भी नहीं लेकिन फिर भी एक अंजान आदमी पर इतना भरोसा कैसे ओर क्यू ??? हो सकता है वो आदमी उसे गलत रास्ता बता दे और वो काही  और पाउच जाए

यह क्या बात है क्यू क्यू  ऐसा क्या है कि हम अंजान लोगो पर भरोसा कर लेते है ???

क्या आपके साथ कभी ऐसा कुछ हुआ हौ अगर है तो कोममेंट्स बॉक्स में ज़रूर बताइये

कुछ लोगो को सपने रात को ही क्यूँ आते है

सपने-सपने यह सपने सब को आते है ! किसी को रात को सोने के बाद आते है और किसी को दिन मे जागते हुए आते है  लेकिन ज्यादातर यह #सपने लोगो को रात को सोने के बाद आते है ! किसी ने कहा था कि सपने मत देखो कुछ कर के दिखाओ बिल्कुल सही कहा था सपने देखने से कुछ नहीं होता !

खैर क्या आपने कभी सोचा है कि सपने देखने के लिए रात को सोना पड़ता है और सोने के लिए दिन भर काम करना पड़ता है और क्या आपको पता है इसी काम से हमे कामयाबी मिलती है और इसी कामयाबी का हर किसी के लिए एक अलग ही मतलब होता है ! वो कहते है ना कि जितने मुह उतनी बाते !!!!!

कामयाबी-कामयाबी शब्द एक लेकिन मतलब अनेक ! कामयाबी का मतलब कुछ लोगो के लिए पैसा कमाना है ! तो वही कुछ लोगो के लिए कामयाबी का मतलब ही बिल्कुल अलग है ! इन लोगो के लिए इनकी इज्ज़त ही इन लोगो की कामयाबी है !

कामयाबी को पाने के लिए लोग काम करते है और काम करने के लिए सपना देखना ज़रूरी है क्यूँ के जब किसी के पास सपना ही नहीं होगा तो कोई काम क्यूँ करेगा ! तो अब हम कहे सकते है कि सपने देखने से कुछ तो नहीं लेकिन कुछ कुछ होता है ! तो #दोस्तो सपने देखो और उन्हे पूरा करने के लिए मेहनत करो ! सपने ही सच होते है ! लेकिन सपने सच करने के लिए सपने होने भी चाहिए जब सपने ही नहीं हौंगे तो सच क्या हौंगे ! कोई काम क्यूँ करेगा , क्यूँ के कोई सपना तो है नहीं , तो कोई काम क्यूँ करेगा !!!!

सपने उन्ही लोगो के पूरे होते है जिनके पास सपने होते है ! जो लोग उन सपनों के लिए मेहनत करते है लेकिन सब लोगो के सपने अलग अलग होते है ! तो इसी वजह से सब को मेहनत भी अलग अलग करनी पड़ती है ! सपनों को सच करना हो तो सब से पहेले सपने देखने हौंगे !!!

Team By Hamarahosla.com

किस की क्या ओर कितनी औकात

दुनिया मैं बहुत से लोग है | लेकिन सब की सोच अलग अलग है | औकात किस की क्या ओर कितनी औकात है | यह दुनिया एक  है लेकिन इस मैं रहने वाले लोग बहुत से है | और  सब की एक अपनी अलग सोच है औकात और  हासियत भी | यह दुनिया एक है लेकिन इस मैं रहने वाले लोग केई तरह की सोच रखते है | जैसे की कुछ लोगो को अपनी औकात हासियत का ज्ञान होता है लेकिन कुछ लोगो को नहीं होता कुछ लोग अपनी औकात जानते है | लेकिन कुछ लोग नहीं जानते इसीलिए जो लोग अपनी औकात ओर हासियत नहीं जानते | वो लोगो से कहते है के तुम्हारी या तेरी क्या औकात है | इन् जैसे लोगो को अपनी औकात ओर हासियत तो पता नहीं ओर दूसरों से कहते है कि तुम्हारी या तेरी क्या औकात है |  This image has an empty alt attribute; its file name is Screenshot_2019-01-09-18-21-28-211_com.miui_.gallery.png


यह दुनिया एक बहुत अच्छी ओर खूबसूरत जगह है | ओर हम सब को मिल कर इसे ओर भी ज़्यादा खूबसूरत बनाना चाहिए | हम सब को इस दुनिया मैं मिलकर ओर एक जूट होकर रहना चाहिए जिससे हम आने वाली परेशानियों से बच सके ओर इस खूबसूरात दुनिया मैं हमारी ज़िंदेगी भी खूबसूरात हो जाए ओर हमे ज़िंदेगी जीने में      मज़ा आए | ओर ज़िंदेगी जीना आसा न हो जाए |    This image has an empty alt attribute; its file name is hosla-1.jpg
अक्सर जब भी लोग आपस मैं लड़ते है | चाहे वो कोई भी हो जैसे की दोस्त हो या रिश्तेदार हो या कोई पड़ोसी हो या ऑफिस या दुकान का हो खैर कोई भी अपने एक बात तो ज़रूर सुनी होगी | जब भी दो या दो से ज़्यादा लोग आपस मैं लड़ते है तो कोई एक कहता है कि तेरी क्या औकात है तेरी क्या औकात है | यह बात क्यू कहते है लोग | क्या है औकात ओर कैसे पता चलता है औकात का कि किस की कितनी औकात है | कैसे पता लगाते है यह लोग के सामने वाले की क्या औकात है | या फिर उस बंदे से पूछते है | कि तेरी क्या औकात है | बता मुझे मैं तुझे पैसे देता हो | पता नहीं क्यू बोलते है यह बात लोग |
आइये देखते है कि कब ओर कहा किस की कितनी औकात होती है | जैसे की कोई भी रिक्शा मैं कही जाता है | तो रिक्शा वाला उससे कितने पैसे लेता है | कम से कम बीस (20) रुपे तो उस की औकात कितनी हुईं बस बीस रुपे की अगर हम बीस रुपे रिक्शा वाले को नहीं देते तो वो हमे जाने नहीं देगा ओर उस बंदे से कहेगा कि तेरी क्या औकात है | तू बीस रुपे भी नहीं दे सकता | यहा उसकी औकात हुई बस बीस रुपे की |
अगर कोई किसी टॅक्सी मैं जाता है तो उसकी औकात थोड़ी ज़्यादा हो जाती है | जैसे की कम से कम सौ (100) रुपे अब उसकी औकात सो रुपे की हुई | ओर हम सब जानते है कि आज के इस लाइफ़स्टाइल मैं सो रूपर ज़्यादा नहीं होते |
अब भी अगर किसी को अपनी औकात थोड़ी ज़्यादा बारानी हो | तो वो बस मैं जा सकता है | क्यू के बस का किराया रिक्शा ओर टॅक्सी से थोड़ा ज़्यादा होता है | तो इसीलिए उसकी औकात भी थोड़ी ज़्यादा होजाती है | तीन पहिये वाले वअहन कौन से होते है | बहुत ही सिम्पल सा सवाल है | जी मैं रिक्शा की बात नहीं कर रहा | बिलकुल सही सोचा आपने मैं बात कर रहा हो एरोप्लेन की | उस मैं भी तीन ही पहिये होते है ओर रिक्शा मैं भी | कुछ लोगो की सोच ही छोटी होती है | ओर वही लोग कहते है | कि तेरी क्या औकात है | खैर अगर कोई एरोप्लेन मैं कही जाता है तो उसकी औकात रिक्शा टॅक्सी ओर बस वालों से थोड़ी ज़्यादा हो जाती है |
औकात औकात औकात ||| क्या हैं यह औकात यार अरे यार उस औकात की भी क्या औकात जोह हर जगह बदलती रहती है | मैं आपसे कहना चाहता हूँ के सामने वाले की औकात को नहीं सामने वाले को देखो छोटा हो या बड़ा हो पैसे वाला हो या गरीब हो इज्जत दोगे तो इज्जत मिलेगी | आपने मुझे अपना इतना टाइम दिया इसके लिए थैंक्स |

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